Thursday, 19 November 2015

गीता सत्संग-7

सबको जय श्री कृष्ण...!!!
एक motto ,एक आदर्श वाक्य जो इस चर्चा में रहेगा वो हैं " जीना हैं तो मौज से जिये " मौज से जिये और वो कैसे संभव हैं ? बहुत लोगो को आप में से ऐसा लग सकता हैं की कहना आसान हैं लेकिन संसार की बदलती, बिगड़ती परस्थितियों में मौज से जी पाना ,मौज में रह पाना हैं बहुत कठिन..!! its very difficult,so difficult we can't say,ऐसी बहुत से बाते हैं,आपके मन में ये सुन कर के आसकती हैं,we agreed हम आपकी इन बातो से सहमत हैं ,भारतीय,हिन्दू,सनातन परम्पराओ में बुद्धि  को बहुत महत्व दिया गया हैं ,बुद्धि का निर्णय जैसा होता हैं ,मन के विचार वैसे बनते हैं ,मन वैसाplanning करता हैं ,मन वैसी योजनाये बनता हैं |

और फिर जीवन की गाढ़ी तो उधर चल ही पढ़ती हैं ,सारथि घोड़ो की लगाम जिधर खींचता हैं आप जानते हैं रथ उधर को ही चलता हैं | driver starring को जिधर मोड़ता हैं गाढ़ी उधर को ही चलती हैं | बुद्धि जैसा निर्णय करती हैं,जीवन के गाढ़ी उसी ओर चलने लगती हैं और इसीलिए आज सबसे पहली बात आपसे यही कही जा रही हैं की जीवन को अच्छे ढंग़ से जीने का एक firm decision करे ,ढृढ़ निश्चय करे ,मन बनाये,विचार बनाये की जीवन को मुझे अच्छे ढंग़ से जीना हैं और आपके इस निर्णय में आपको सहयोग करेगा meditation ,ध्यान..|जब आप कुछ क्षण ध्यान का अभ्यास प्रारंभ करेंगे ,तो वो अभ्यास  इसमे आपकी सहयता करेगा ,आपको बल मिलेगा ,आपकी बुद्धि जो हैं found decision करने में अपने आपको सक्षम पायेगी और जब इसमे आपको एकग्रता का लाभ मिलेगा आप पायंगे की जब, जीवन की अच्छे ढंग़ से जीने की एक शुरुवात हैं ,ध्यान जीवन का एक बहुत मजबूत आधार हैं ,ध्यान हमारी आध्यत्मिक शास्त्रीय भाषा में निदध्यासन-meditation ,meditation करे, अवश्य करे, नियम से करे, भले ही आप सिर्फ 5 मिनट से प्रारम्भ करे ,लेकिन ध्यान करे ये विश्वास रखे की ध्यान जीवन का आनंद हैं ,ये विश्वास रखे की ध्यान जीवन की ऊर्जा हैं ,ये विश्वास रखे की ध्यान जीवन का एक बल हैं,एक सम्बल हैं ,एक नीव हैं ,फाउंडेशन हैं,मजबूत,सुंदर,स्वस्थ आनंदमय जीवन,की ध्यान.. !!

ध्यान के लिए आप बिलकुल सहज भाव बनाये और उससे पहले एक बात और कहे ,ध्यान की प्राम्भिक आवश्यकताओं के रूप में जब भी आप ध्यान में बैठे | हल्के वस्त्र पहने ,हल्के वस्त्रो का अभिप्राय मर्यादित लेकिन बहुत ऐसे नही जिससे आप ठीक आसान पर न बैठ सके |ऐसे वस्त्र पहने सहज मर्यादित ,अच्छे ,स्वछ,और फिर एक अच्छे स्थान पर ,शांत बैठे ,एक सहज सा आसान लगाये |जिसपर आप बहुत आराम से बैठ सके कोई हल चल नहीं ,किसी प्रकार की |बहुत आराम से बैठे और बैठकर कर के धीरे से नेत्र बंद करे |दवाब देकर नही,तनाव बनाकर नही,भींच कर नही ,बहुत lightly |अंदर कोई तनाव नही,कोई दवाब नही,इस समय में ये विश्वास बनाये ये समय मेरा अपने लिए हैं,संसार की इस भाग दौड़  में ये निश्चित करले ,की कुछ क्षण मुझे अपने लिए, you yourself will realize energy ,peace ,confidence ,boldness and everything,you will find,you will realize ,you will feel in your inner self...!!

आओ कुछ क्षण ध्यान के लिए निकाले,आगे की बात फिर आगे आज इसी पर विचार करे और जीवन के महत्व को समझे,जीवन के महत्व के साथ-साथ ध्यान की दिव्यताओं में बढ़ने का प्रयास और ये भी निश्चित करले की हमे कुछ मिनट नित्य प्रति,in our daily routine निकालने हैं,ध्यान के लिए,अपने लिए,अपने जीवन के आनंद के लिए | ओम ओम ओम...!!!

गीता सत्संग वीडियो-7-(विडियो लिंक) 

4 comments:

  1. This is a wonderful initiative to share Gita Satsang via Blog.....Jai shree Krishna...Jai Gurudev !!

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  2. This is a wonderful exprience. I read your teachings everyday in my phone. I hope this will bring a change in my life. I am very thankful to maharaji for all for all the efforts he is doing for us. Jai guru dev

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