Thursday, 26 November 2015

गीता सत्संग-13

जय श्री कृष्ण,जय श्री राधे..!!!
आप सब के साथ कुछ जीवन के और आगे के तत्व महत्व पर विचार | इस इशारे के साथ की आप शांत रहे अपने आपको यही रखे जो कहा जा रहा हैं उसे सुने | शरीर से आप यहाँ हैं ,देख रहे हैं ,सुन रहे हैं अच्छी बात लेकिन मन से यहाँ रहे आवश्यक बात, जरुरी हैं | मन से आप यहाँ नही होंगे कही और होंगे तो शरीर से यहाँ होते हुए भी सच पूछो तो आप यहाँ नही होंगे | सिद्धांत यही कहता हैं | मनोविज्ञान psychology ये स्पष्ट करती हैं | के we are not there where  our body,we are where there our mind is | हम वहा नही हैं जहा हमारा मन हैं ,हम वहा हैं जहा हमारा मन हैं | वास्तविकता भी तो यही हैं की जीवन ही नही अगर अच्छे  ढंग़ से जिया जा रहा तो फिर ये संसार ,संसार का व्यवहार ,संसार का सौन्दर्य इसकी उपयोगिता कहा और क्या ? जीवन को जिये, जीना हैं मौज से जिये ..!!!!

फिर से कुछ विचार करे मौज से जीने की कुछ ढंग़ आओ जीना सीखे ..!!! let us know how we leave | जीवन जीने का ढंग़ बाहर का संसार अच्छा हैं | धन कमाये आवशयक हैं | व्यवहार करे वो भी निश्चित जरुरी हैं | लेकिन एक विशेष संकेत आज सब की लिये की बाहर  की दौड़ में आँखे बंध न करले | बाहर की दौड़ में आँखे खुली रखे आप खुली आँखों से | जिसे कहा जाता हैं अंधी दौड़  उसमे शामिल ना हो | भागना बुरा नही ,आगे बढ़ना बुरा नही ,विकास करना बुरा नही | Development बुरी नही जीवन में वो सब अच्छी हैं ,आवशयक हैं करे |

भगवान आप सब को शक्ति दे बल दे आप सब पर कृपा करे ,की जीवन को आप सब अच्छे से जी सके ,जीवन को अच्छी तरह से समझ सके  और साथ साथ बाहर की दौड़ में भी उसमे भी पिछड़े नही ऐसी भी प्रभु आप सब पर कृपा करे | धन जीवन जीने के लिए आवशयक हैं इस बात से कोई असहमति नही | बिलकुल सहमत हैं इस बात से, शारीरिक अव्यशकताओ  के लिए ,परिवार के जिम्मेवारिया पूरी करे के लिए | धन कमाये बुरा नही लेकिन धन के साथ साथ धर्म अवशय कमाए | हमारे ऋषियों ने हमारी सांस्कृतिक  परम्पराओ में धन के महत्व से इंकार नही किया लेकिन ये अवश्य कहा हैं धर्म,अर्थ ,काम और मोक्ष  | जीवन के ये चार पड़ाव समझे ,आदर्श समझे जीवन जीने का एक ढंग़ समझे | धर्म साथ रहे, धर्म आगे रहे और धर्म का तत्व क्या हैं ?

धर्म कोई ऐसी स्थिति नही के जीवन से अलग कोई वेश विशेष के रूप में या कही कोई स्थान विशेष के रूप में या कही कोई मंदिर,गुरुद्वारा कोई कही विशेष स्थानो तक सिमटा हुआ | सब धर्म स्थान अच्छे  हैं | लेकिन आप धर्म ये माने धर्म जीवन का एक अंग हैं ,धर्म जीवन की एक सुंदरता हैं | धर्म  जीवन को अच्छे ढंग़ से जीने का एक ढंग हैं | धर्म क्या हैं way of life , जीने के पद्धति का नाम धर्म हैं | जीवन जीने के ढंग़ का नाम धर्म हैं और इसलिए गीता प्रारम्भ ही  होती हैं धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे , भगवानकहते हैं ऐ मानव ! तू अपने कर्म को धर्म बना | make your field of action righteous | अपने प्रत्येक क्रिया के साथ धर्म को जोड़ता चला जा | अपने प्रत्येक क्रिया को धर्ममय बनता चला जा |

आओ शुरुवात करे प्रारम्भ करे के कैसे धर्म जीवन का अंग बने | बहुत सरल विषय हैं | आप सबसे ये बात हम विशेष रूप से कहदे के किसी भी तरह से आप इसे मुश्किल ना समझे ,किसी भी तरह से आप इसे आप अपनी पहुंच से बाहर ना समझे | it is not beyond your reach,within your reach,you can do this,easily you do this | |आप आसानी से ऐसा कर सकते हैं | आप ऐसा विश्वास रखे धर्म को आप जीवन में लेकर चल सकते हैं | बहुत बार हम ऐसा मान  लेते हैं के धर्म और आज का जीवन दोनों में जब देखते हैं तो हमे लगता हैं के आज तो  बिल्कुल भौतिकवादिता का जीवन पूरी तरह से materialism में रचा पचा हुआ जीवन ,रमा हुआ जीवन | कभी कभी ऐसा भी लगता हैं के विज्ञानं के इतने ऊंचिया ऐसे ऐसे सुख सुविधाओ के साधन और उसमे  महाराज आप ..!! धर्म की बात करते हो कहा applicable हो सकती हैं | नही सच मानो आज के इस बात को बड़े ध्यान से सुनो समझो | सच मानो जितने आज के इस वैज्ञानिक भौतिकवादी युग में  scientific materialistic age में जितनी धर्म को साथ लेकर चलने के जरूत realize की जा रही हैं,महसूस की जारही हैं शायद पहले नही थी |

क्यूकी धर्म तो उस स्थिति का नाम हैं जो बाहर के materialism में रहते हुए,भौतिकवाद में रहते हुए ,बाहर के इस हरियाली खुशियाली चकाचोंध ,तामझाम में रहते हुए भी जो जीवन को अच्छे ढंग़ से सीखा दे धर्म तो वो हैं और इसलिए ये मत मानो के यदि आप ऐसा मान लेंगे की धर्म हमारी पहुंच से बाहर हैं तो सच में जीवन में बहुत से विकृतिया आती रहेंगी बहुत से vicious ,बहुत से evil जीवन में आने शुरू हो जाएंगे |जीवन में धर्म को साथ रखना बहुत आवशयक हैं |  बहुत आवशयक हैं | और उसकी शुरुवात प्राम्भ से करे प्रातः काल से, दिन के शुरुवात कहा से होती हैं निद्रा के बाद  जब आँख खुलती हैं आओ यही से धर्म को पकड़े आओ यही से हम परमात्मा को साथ ले ,परमात्मा क्या हैं धर्म का सार  तत्व हैं |     
गीता सत्संग वीडियो-12- (वीडियो-लिंक)

No comments:

Post a Comment