सबको जय श्री कृष्ण...!!!
मीरा का विष अमृत बना वो केवल इसीलिए पूर्व में हमने भगवान को भोग के भाव की बात में ये संकेत किया था केवल इसीलिए की प्रतिकूलता में मीरा गभराई नही,डगमगाई नही उस समय भी मीरा का ध्यान गोबिंद में रहा,मीरा का ध्यान उसके भाव में रहा,मीरा ने अपने मन की वृितियो को उसमे जोड़ कर के रखा ,उस समय भी जब पूरी तरह negatives ही negatives,against ही against था सब कुछ ,तब भी मीरा कृष्ण भाव में थी और उसका परिणाम क्या हुआ,परिणाम वही की वहां विष के पियाले में गोबिंद,विष की पियाले में श्याम सुन्दर |
आओ...!!! प्रयास करे कुछ ऐसा जीवन बनाने का ,कुछ इस ढंग़ से जीवन को जीने का जहा एक balanced स्थिति बने,जहा कुछ प्रतिकूलता हैं उसमे भी हम उसका भाव लेके जीये,कृपा देखे,हर ओर कृपा देखे,प्रकृति हैं ये उसकी कृपा हैं ,ये खिले हुए मुस्कुराते फूल हैं ये उसकी कृपा हैं ,लहलहाती प्रकृति हैं ये उसकी कृपा हैं ,पूरा संसार ये उसकी कृपा ही हैं,कुछ भी हमारे पास हैं ये उसकी कृपा हैं, और तो और ये जीवन भी हैं तो ये भी उसकी कृपा हैं ,ऐसा मानकर कर के चले..
और एक संकेत हमने किया था के कृपा जिसे देखनी हैं वो तो आँख खुलेगी तो भी उसकी कृपा का अनुभव कर लेगा,तो भी उसकी कृपा का अनुभव कर लेगा...!!! positive रहे ,सकारात्मक रहे,उसकी कृपा के भाव में रहे और एक बड़ा सीधा सा चिंतन हैं -As You Think So You Become ,जैसा सोचते जाओगे वैसा बनते चले जाओगे ..बिलकुल ये एक scientific fact है ये,scientific ,वैज्ञानिक सत्य,आध्यात्मिक सत्य तो हैं ही हैं,ये religious fact, spiritual fact तो हैं ही हैं ,लेकिन scientific fact भी हैं , universal fact के रूप में हैं ये-As You Think So You Become ....
जैसा सोचोगे वैसे बनोगे,जब negative ही negative सोचते रहोगे तो मन वैसा ढलता चले जायेगा और जब positive और विशेष रूप से positive में भी उसकी कृपा को सोचोगे तो कृपा को सोचते सोचते,कृपा का भाव लगातार बनाये रखते हुए,बनाये रखते हुए निश्चित समझो की आपको उसकी कृपा का अनुभव होता रहेगा और उस कृपा के अनुभव में तो आप का खुली आँखों में भी ध्यान होगा,खुली आँखों में भी ,क्युकी वही देखेगा.....!!!!
गीता सत्संग वीडियो-3 (विडियो लिंक)

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