Thursday, 19 November 2015

गीता सत्संग-6

सबको जय श्री कृष्ण...!!!
अब आईये थोड़ा इससे आगे बढ़ते हैं जीवन महत्वपूर्ण हैं,बहुत महत्व हैं इसका ,लेकिन इसका लाभ हम कैसे ले ? जीवन को जीये कैसे ? यह भी निश्चित हैं की जीवन जीने के लिए हैं और जीने के लिए भी उस ढंग़ से नही जैसे कोई बहुत पुराना गीत आप लोगो के ध्यान में होगा "दुनिया में हम आये हैं तो जीना ही पढ़ेगा ,जीवन हैं अगर जहर तो पीना ही पढ़ेगा" ऐसा कुछ नही जीवन के साथ ,ठीक हैं इस गीत की सामूहिक परिस्थिति रही होगी,और ये गीत उस परिस्थिति में उस ढंग से गाया गया होगा.. अच्छा हैं ,अच्छी  बात हैं लेकिन जीवन की जो वस्तु स्थिति हैं वो जीना पढ़ेगा,जहर पीना पढ़ेगा उससे कुछ अलग हैं ,अतीत हैं, उससे कुछ जब हम चिंतन में लेंगे तो हमे लगेगा की जीवन की कुछ अलग मौज भी हो सकती हैं, जब हम जीने  के ढंग़ को सिख लेंगे,समझ लेंगे,विचार लेंगे..

और अब हम  उसी बात पर आते हैं की जीवन को अच्छे ढंग़ से जिया कैसे जाये ? जीवन मेरे भाई बहन..!! केवल काटने के लिए नही हैं जैसा बहुत लोग आम भाषा में कह देते हैं जब पूछो कैसे हो  बस " कट रहा हैं जीवन " जीवन काटने के लिए नही हैं..जीवन time pass करने के लिए भी नही हैं ,बहुत बार ऐसा भी होता हैं के हम ये भी कह देते हैं के हम तो बस time pass  कर रहे हैं |नही..!! time तो pass हो रहा हैं ...हर बात पे विचार करे ,हमारा ये भी आग्रह आप सब से यहभी जीवन को थोड़ा विचार से जीये ,समय को अपनी गति से निकलना हैं ,समय अपनी गति से निकल रहा हैं ,समय के एक ही गति हैं किसी के रोके रुका नही समय ,किसी के बुलाये,लौटाये लौटा नही समय,ये आप सब जानते हैं, Past can never be recalled ,अतीत को recall नही किया जा सकता ,ये बात भी स्पस्ट हैं के time and tide waits for none..समय और पानी की लहरे जैसे गंगा जी में आप देखते हैं प्रतीक्षा नही करती, रूकती नही ,उनका एक प्रवाह हैं ,एक क्रम हैं,समय चल रहा हैं,time pass हो रहा हैं ,हमने नही करना ,हमने तो समय का सदुपयोग करना हैं ,जो समय का सदुपयोग सिख लेता हैं वो अपने इस जीवन का सदुपयोग कर लेता हैं,  वो मनुष्य जीवन के रूप में मिली हुई इस ईश्वरीय कृपा का भरपूर आनंद ले ले लेता हैं... 

पर ये बात भी आपसे स्पष्ट करदे जीवन आनंद के लिए हैं और आनंद जीवन के लिए हैं ,जीवन में आनंद लिया जा सकता हैं |बहुत बार ऐसी बात भी आती हैं के जीवन काँटों की शैया हैं ,जीवन कंटीला हैं,दुःख पूर्ण हैं |हा..!!हो सकता हैं संसार के परिस्थितियाँ कई बार जीवन को ऐसा बनाने का प्रयास कर सकती हैं ,करती हैं लेकिन फिर भी हम आपसे कहे जीवन आनंद के लिए हैं ,आनद जीवन में लिया जा सकता हैं ,अनुभव किया जा सकता हैं जीवन को एक मौज बनाये ,जीवन को सहज आनंद से जीये और उसमे सबसे पहली बात इस  जीवन के महत्व को समझे जीवन में आपके पास अंदर बहुत कुछ ह ,बहुत कुछ हैं आपके अंदर, सच में आनंद भीतर हैं,ऊर्जा भीतर हैं,शांति भीतर हैं ,सद्गुणों का भंडार भीतर हैं,enlightenment,प्रकाश भीतर हैं ,सब कुछ भीतर हैं थोड़ा सा इस जीवन के महत्व को समझे .... 

एक बात और हैं आश्चर्य होगा आपको ,सम्पदा आपके पास हो ,धन आपके पास हो ,वैभव आपके पास हो,लेकिन पास होते हुए भी  यदि हम भिखारी जैसा जीवन जीये ,कांगलियत का सा जीवन जीये तो आपको कैसा लगेगा के सबकुछ पास और दुसरो को भी कैसा लगेगा ,के सब कुछ होते हुए भी ये कैसा जीवन ?ऐसा क्यों इसीलिए के सब कुछ पास होते हुए भी उसका उपयोग नही कर रहे ,उसे उपयोग में नही लाया जा रहा ,जीवन में जीवन से जब सब कुछ मिल सकता हैं तो क्यों न उसे उपयोग में लाये..!! आओ जीवन को जीना सीखे..!! 
गीता सत्संग वीडियो-6 (विडियो लिंक)

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