सबको जय श्री कृष्ण...!!!
ध्यान में आँख बंद करके उसे अनुभव करना हैं,उसमे वृति जोड़नी हैं तो यदि कृपा के भाव में वृति रमे गी, जमे गी,तो खुली आँखों में भी एक आपको समाधि का सा.और कभी कभी सहज आनंद ध्यान का आनंद मिलेगा और यदि उस भाव को लेकर आप कभी आँख बंद करके बैठोगे और केवल कृपा का स्मरण करते करते बैठोगे ,कृपा का भाव बनाये बनाये बैठोगे ध्यान में बिलकुल सीधे ,सजग ,आँख बंद करके और उसकी कृपा का स्मरण करते हुए ,अंदर से लेकर बाहर प्रकृति तक ,अंदर के अपने सिस्टम से लेकर ,ह्रदय के धड़कन में उसकी कृपा देखो जो लोग कहते हैं ध्यान में मन नही लगता,आँख बंद करे और हृद्धय धड़क रहा हैं ,ह्रदय के धड़कन ,heart palpitation जो हैं उसमे उसे देखे की तेरी कृपा हैं ,स्वांस चल रहे हैं ,उसमे उसे देखे ये तेरी कृपा ,blood circulation हजारो हजारो नाड़ियो में लगातार हो रहा हैं एक feeling बनाये बहुत delicious feeling ,बहुत blissful feeling हैं ये, feeling बनाये की तेरी कृपा ही प्रत्येक नाड़ी में blood circulation क़े रूप में चल रही हैं,भोजन करने क़े बाद digestion ये कृपा नही तो और क्या हैं ? कुछ भी खाए और लाल रंग का ख़ून blood cells जो अंदर हैं वो कृपा क़े अतिरिकित क्या हैं सोचे और ऐसा ही कृपा का भाव बनाये रख कर क़े ,कुछ ऐसा अंदर से अहसास करे..
"तू स्वांसो क़े हर तार में रम रहा हैं तू धड़कन क़े हर साज में बज रहा हैं ,कभी भूलकर भी न तुम को भुलाओ हे नाथ नारायण वासुदेवाय" इसी भाव में कुछ समय ध्यान में एकाग्रता,concentration करे अपने आपको ,connect करे अपने आपको उस divine base में,उस divine consciousness में और उसमे कुछ मिनट अपने आपको पूरी तरह से समाहित रखे कोई और भाव नही कृपा,कृपा ,कृपा...!!!ओम,ओम,ओम...!!!
गीता सत्संग वीडियो-4 (विडियो लिंक)

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