Friday, 13 November 2015

गीता सत्संग-2


सबको जय श्री कृष्ण...!!!
आप देखते ही हैं के माँ प्यार भी देती हैं ...कभी कभी माँ थोड़ा डांट भी सकती हैं और डांट भी देती हैं..!!! हैं तो बच्चे का दोनों में लाभ ही ना, माँ अगर बच्चे को प्यार भी देती हैं तो भी उसमे बच्चे का लाभ हैं | और माँ यदि बच्चे को कभी कोई डांटती हैं ,कोई तीखा शब्द भी कहती हैं, वो भी बच्चे का अहित माँ तो नही चाहेगी ना,बच्चे का बुरा माँ तो नही चाहेगी ना,माँ तो यही कहेगी के बच्चा किसी भी तरह से सन्मार्ग पर चले,अच्छे रास्ते पर चले,अच्छा बनकर रहे और उसके लिए हो सकता हैं माँ को कुछ ऐसा attitude बनाना पढ़े,कुछ ऐसा भाव बनाना पढ़े..

तो दोनों रूप में देखो ,कभी ऐसा होता भी हैं | कई बार ऐसा भी होता हैं हम negatives में बहुत जल्दी अटक जाते हैं | हा... थोड़ा सा हमारे negative होता हैं हम वही अटक जाते हैं और हम कभी कभी तो भगवान को हम शिकवा भी देने लगते हैं के ऐसा क्यों होगया,ऐसा क्यों नही हुआ,तूने ये क्यों कर दिया ,नही..! कोई बात नही..!बहुत से हमारे according हैं..!बहुत से अनुकूल बाते हुई हैं...!बहुत कुछ उसने अनुकूल दिया हैं ...!यदि कही थोड़ा हैं तो उसको भी यही कहो के प्रभु ये भी कोई तेरी इच्छा,तेरी कृपा हो...!

और सच मानो यदि ...किसी प्रतिकूल परिस्थिति  में थोड़ा आप bold रहे ,थोड़ा पक्का रहे ,थोड़ा शांत रहे ,मन को balanced रखे ,मन को बहुत ज्यादा डगमगाने ना दे ,तो वहां प्रभु के कृपा और अच्छे ढंग़ से आप अपने अंदर अनुभव कर सकते हो..!आप ऐसे करे,भगवान ना करे के आपके जीवन में कही कोई प्रतिकूलता आये...लेकिन अगर कही ऐसा होता भी हैं क्युकी संसार हैं ना ,संसार में तो दोनों sides हैं,दोनों opposites pairs हैं संसार में..!फिर भी blessings,best wishes,शुभ कामनाये आपके लिए हैं ही के भगवान ऐसे कृपा करे,अनुकूलता रहे लेकिन मन को फिर भी ऐसा बनाओ के अगर कोई कही प्रतिकूलता हैं भी उसमे भी उसकी कृपा का अनुभव करो,आपको निश्चित वो स्वयं वहां अनुभव होगा....!

गीता सत्संग वीडियो-2 (विडियो लिंक) 

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