Friday, 27 November 2015

गीता सत्संग-14

जय श्री कृष्ण,जय श्री राधे..!!!
आप देखोगे जहा भगवान राम की बात आयी रामो विग्रहवान धर्मः कहा गया | राम क्या हैं साक्षात धर्म |यतो कृष्णः ततो धर्मः जहा कृष्ण हैं वही धर्म हैं  ऐसा संकेत किया गया | 
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥
जहा कृष्ण हैं वह नियति  हैं ,अटल नियति हैं,वहा सत्य हैं | वहा श्री हैं | वहा विजय हैं यही तो धर्म हैं | धर्म और हैं क्या नियति ,सद्गुण,सदभाव ये सब धर्म हैं | और इसलिए ये संकेत आओ प्रातः काल से धर्म को साथ ले प्रारम्भ से ,आज का ये विशेष संकेत प्रातः काल जब आँख खुले एक क्षण के लिए मौन बैठे | एक बार आँख खुले फिर एक बार आँख बंद करले |जहा उठे हैं ,जैसे उठे हैं उसी अवस्था में सहज बैठ कर के ईश्वरीय कृपा का धन्यवाद करे | मेरे नाथ आँख भी खुली हैं तो तेरी कृपा से खुली हैं एक क्षण के लिए आप इसी समय मौन हो आँख बंद करे विचार करे की क्या ये सच्चाई नही हैं आपको लगेगा निश्चित लगेगा की आँख खुली हैं तो उसकी कृपा से खुली हैं | 

सो गये कहा पता था किस करवट में कहा हैं | संसार कहा नींद की अवस्था में कौन जानता था ? परिवार कहा sound sleep  में कहा ध्यान था व्यापर ,व्यवहार सब अलग थे गहन निद्रा में, अपने शरीर का भी तो आभास नही था | where is world  ,worldly things ,beings,relations even around body | हमारा शरीर भी हमे कहा ध्यान था ? आँख खुली हैं उसकी कृपा से यही से धर्म का प्रारम्भ यही से दिन चर्या का प्रारम्भ ,परमात्मा की प्रति कृतज्ञता की भावना के साथ दिन का प्रारम्भ | हे नाथ ! आँख भी खुली हैं तो तेरी कृपा से खुली हैं अपनी कृपा बनाये रखना | विश्वास करे यदि आप ऐसा नित्य प्रति करेंगे ईश्वरीय कृपा के दृष्टि का अपने आप लाभ मिलेगा | एक सहज भाव होता हैं जब हम उठते हैं | बड़ा शुद्ध शांत समय होता हैं जब हम उठते हैं | वातावरण में सात्विकता होती हैं उस समय में सहज शांति होती जब उठे ही जब हमारा ध्यान उधर जायेगा तो भगवान का ध्यान हमारी और खिंचेगा के ये जीव उठते ही मेरा ध्यान कर रहा हैं | मेरी ओर इसका ध्यान गया हैं | भगवान के सहज कृपा का लाभ मिलेगा धर्म जीवन में प्रवेश करना प्रारम्भ हो जायेगा | यही से religion will get entry in our life ,धर्म का प्रवेश हो जायेगा |   

और फिर वही बात इस सबके साथ साथ ध्यान meditation  आवशयक हैं उसी क्षण भी उसी भाव के साथ ध्यान लग रहा हैं तो कोई बात नही आप ध्यान लगाये मौन बैठ जाये कुछ क्षणों के लिये और मौन वृति को जोड़े यद्यपि ध्यान स्नान करके सजग करके किया जाये अच्छा हैं ,आवशयक हैं | हा,उसमे कारण ये हैं वैसे तो  आप कभी ध्यान में बैठे, कैसे बैठे उसका लाभ हैं | लेकिन फिर कही प्रमाद,आलस्य फिर हावी ना हो जाये इसीलिए स्नान करे और स्नान करके पूर्ण जागरूकता हो सके तो कुछ क्षण प्राणायाम करे कुछ शारीरिक आसन करके जागरूकता लाये शरीर को सजग बनाये सक्रीय बनाये और फिर मानसिक दृढ़ता के साथ आराम से बैठे बाहर का संसार बाहर  सब कुछ भूल जाये  ,निश्चिन्त पूरी तरह care free जिसके ध्यान में बैठे  हैं चिंता वो करेगा करता हैं, करेगा उसी पर छोड़े निश्चिन्त बैठे अंदर से अपने आप खाली करे भीतर का विश्वास जगाये ये समय केवल और केवल मेरा और मेरे जीवन के आनंद के लिये हैं ढृढ़ निश्चय जगाएंगे when you have firm faith determination | आगे के स्थिति अपने आप आसान होती जाएगी ढृढ़ निश्चय बना के बैठे शांत बैठे | विश्वास   जगाये,निश्चय बनाये की मुझे अपने जीवन के आगे ये आदर्श बनाना हैं जीना हैं  मौज से जी | आगे के बात फिर आगे आज इसी पर विचार करे जो सूत्र मिला हैं प्रेणना मिली हैं| इसे श्री कृष्ण कृपा मान कर विचार करे स्वीकार करे ओम ओम ओम.....!!!!!   
गीता सत्संग वीडियो-14- (वीडियो-लिंक)

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