Saturday, 28 November 2015

गीता सत्संग-15

एक बार पुनः सबको जय श्री कृष्ण ..!!!
आओ फिर चले जीवन के सुखद यात्रा में ओर आगे जीवन की बात जीवन के लिए | अच्छे जीवन के लिए सुखद जीवन के लिए | जो बात चल रही थी वो प्रातः काल के नियम की क्युकी हमे इन दिनों जिस चर्चा को विशेष रूप से लेना हैं वो हैं जीवन की दिन चर्या आँख खुलने से प्रारम्भ हो कर अभी हम पहुंचे हैं स्नान इत्यादि के बाद प्रातः काल का नियम पूजा ,पाठ मंत्र जाप और विशेष रूप से ध्यान और उसमे भी जो चर्चा एक practical problem के रूप में व्यवाहरिक समस्या के रूप में सामने आयी आप सबके जीवन और practical reference व्यवाहरिक सन्दर्भ को देखते हुए वो थी मन न लगने की कई बार ऐसा होता हैं कुछ लोग एक दिन,दो दिन चार दिन बैठेंगे जब देखंगे मन नही लग रहा तो ये सोच कर छोड़ देंगे नियम | की क्या करे मन तो लगता नही हैं | यहा आप एक मिनट के लिए विचारे के बच्चा यदि स्कूल दो दिन जाये फिर कहे की मेरा मन नही लगता में नही जाऊंगा i don't want go to school | तो क्या आप उसे ये कहोगे ठीक हैं नही मन लगता तो घर बैठ जा | शायद नही , आप उसे यही कहोगे की स्कूल तो जाना हैं | स्कूल जब जायेगा क्लास में बैठेगा तो धीरे धीरे पढाई समझ आएगी  मन भी लगेग़ा और अगर स्कूल जायेगा ही नही तो आगे का जो step हैं आगे जो stage हैं वो कैसे achieve होगी पढ़ाई के रूप में | बिलकुल यही स्थिति मन की हैं | in reality mind is a innocent child | मन एक अबोध बच्चे की तरह ही हैं | मन शुरू में कहेगा के नही कुछ मिल रहा नही कुछ हो रहा | और छोड़ने चाहेगा ध्यान को और आप भी सोच लोगे मन नही लग रहा तो छोड़ दे |

आज से इस बात को ध्यान में रखे याद रखना के बच्चे  को अगर पढ़ना हैं तो पहले उसे नियम से स्कूल से जाना सीखना होगा | यदि हम चाहते हैं के लाभ मिले ध्यान का , भजन का,पाठ का तो हमे नियम से बैठना शुरू करना होगा | नियम से बैठे आप एक समय निश्चित करे भले ही थोड़ाin beginning small time ,थोड़ा समय ही आप start करे और बैठे पक्का करे रोज बैठना हैं जैसे आप अपने office  में या अपने business  में ,अपनी shop  में आप 8 घंटे कम से कम बैठते हैं न, सोचो बैठते हैं ,जब हम नींद में जाते हैं 6 घंटे कम से कम कुछ लोग कुछ अधिक कुछ लोग कम विश्राम के लिए जाते हैं न, तो ऐसे ही कुछ समय भी निकालो इतना समय तो मुझे बैठना है और ये समय जो होगा ये ,ये भी निश्चित समझो की ये समय कोई भगवान पर अहसान नही होगा | जो हम उसके लिए बैठंगे ये उस पर कोई अहसान नही हैं | ये समय तो अपने लिए हैं | ये तो अपने आनंद के लिए हैं |ये तो अपने कल्याण के लिए हैं | अपनी betterment के लिए हैं,अपनी energy की लिए हैं | ये समय तो मेरे अपने लोक और परलोक दोनों के सुधार के लिए हैं और मुझे अच्छा  हैं | औरो के लिए भी समय निकाले | लेकिन अपने जीवन को भी तो देखना चाहिए ना | जैसे कोई बार हमने देखा पढाई में जब exam होते थे question papers आते थे उसमे लिखा होता था  के attempt any 5 questions ,कोई पांच प्रशन  करो लेकिन साथ ही प्राय लिखा होता था but first is compulsory  | पहला प्रशन अनिवार्य हैं  |हमे ऐसा ही लगता हैं और आपसे कह भी रहे हैं के जीवन में और भी काम करो जो जो निश्चित हैं वो सब अपने अपने काम ढंग़ से करो ,अच्छे  ढंग से करो लेकिन but its a necessary subject of a life, necessity of a life   ,ये जीवन का अनिवार्य विषय हैं | ये तो करना ही हैं | formality  नही हो , जीवन की अवशयता हैं | 

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