एक बार पुनः सबको जय श्री कृष्ण ..!!!
आप जानते हैं गाड़ी आगे अपने लक्ष्य में गंतव्य में पहुंचने में इतनी मुश्किल नही लेकिन ट्रैक पे आना और गाड़ी का चल पढ़ना बस वहा तक,गाड़ी इससे ट्रैक पर आयेगी मन की ओर,लक्ष्य की ओर,आनंद की ओर बढ़ निकेगी आप इसे करे |
एक छोटी सी समस्या उसको भी हम लेते चले बहुत लोगो को ऐसा भी लगता हैं | की जब पाठ में बैठते हैं ,ध्यान में बैठते हैं तो कही न कही नींद का असर होने लगता हैं | बैठते तो पाठ में हैं ध्यान में हैं लेकिन बैठते ही मन ध्यान में एकाग्र होने की स्थान पर sleeping mode में चला जाता हैं और ऐसी स्थिति हो जाती हैं और उठते हैं तो फिर लगता हैं बैठे तो थे निराशा सी,देखो अंदर की awareness लेके बैठे ,अंदर से जागरूकता लेके इसीलिए पहले कहा गया जो बात हैं की थोड़ा सा व्यायाम थोड़ी सी exercise ,प्राणायाम या कोई शारीरिक सजगता वो भी जरुरी हैं | लकिन साथ साथ मानसिक awareness मन से जागरूक बैठे | मन पर अंकुश रखे ये समय सोने का नही ये समय ध्यान का हैं, भजन का हैं ओर फिर भी ये लगे के मन नही एकाग्र हो रहा ,नींद के ओर जा रहा हैं तो ध्यान छोड़ दे कुछ क्षणों के लिए या तो बोलकर कीर्तन प्रारम्भ करदे | भगवन का नाम loudly उच्चारण करे ,हल्की हल्की ताली भी बजानी पढ़े तो भी बजाए | थोड़ा सा सजगता लाने के लिये कीर्तन प्रारम्भ करदे बोलकर के कुछ नाम उच्चारण करे तो उससे क्या होगा कुछ क्षण सजगता आयेगी | और फिर भी लगे खड़े भी होना पड़े कुछ क्षणों के लिये आप खड़े हो जाये | खड़े होकर ताली बजा कर या हल्का मंजीरा लेकिन जागरूक | होता क्या हैं उस समय हम जागरूक नही रहते जब हल्की सी नींद आती हैं आते आते नींद ही हावी हो जाती हैं |
नींद के सुख में ही मन चला जाता हैं जैसे नींद आने लगे उसी क्षण, आप उसी क्षण ध्यान को छोड़ दे | उसी क्षण आप जाप करे बोलकर के जाप करे या कोई भगवान से आप प्रार्थना करने लगे |भगवान से कहने लगे "मन तुझमे लगे तेरा नाम जपे,मन तुझमे लगे तेरा नाम जपे,मन तुझमे लगे तेरा नाम जपे, मन तुझमे लगे तेरा नाम जपे,गोबिंद हरे गोपाल हरे ,गोबिंद हरे गोपाल हरे" कोई ऐसी प्रार्थना भगवान से करने लग जाये ,भगवान को निहारे ,उनसे कहे के आप बल दो ,शक्ति दो और फिर जब लगे जागरूकता आयी हैं ,सजगता आयी हैं ,शरीर में भी और अंदर मन में भी ,awareness आयी हैं तो फिर बैठ जाये |
और बैठ कर के फिर वही process वही प्रक्रिया वही भाव अंदर की जागरूकता के साथ फिर कोशिश करे अंदर से मन की वृति लगे ,अंदर की तार जुड़े ,मन का connection मिले और उसी ढंग से अंदर ही अंदर या जो नाम धुन अपने बाहर वाणी से उच्चारण की उसी को ही अंदर अपने ध्यान का विषय बनाये उसी भाव से आप अपने आपको ध्यान में ले चले या फिर अपने गुरु मंत्र के सहारे नाम की सहारे या केवल ॐ के आश्रय से |
आगे की बात फिर आगे अभी शुभ कामनाओ के साथ जय श्री कृष्ण...!!!
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